Tuesday, 14 June 2016

ऐ वक्त !


माना के मुनासिब है 
तेरा यूँ चलते जाना 
उस रोज़ कुछ देर
ठहर जाता तो ..
तेरा क्या जाता 
कमबख्त ऐ वक़्त !

Friday, 10 June 2016

फ़ासले

नज़र मिली तो सारे फ़ासले झूठे निकले 
दिल के आबले सच्चे थे मगर गिले झूठे निकले !

Sunday, 1 May 2016

शिक़वा

अनमोल जज़्बों की तिज़ारत के गुनहगार है हम 
तो क्यूँ करें शिकवा के दर्द है बेहद औ बहुत ग़म मिला ।

Sunday, 20 March 2016

मुनासिंब !


तुमको मुनासिब नहीं लगता साथ मेरा 
हमको तुम बिन कुछ भी नहीं लगता है मुनासिब !

Saturday, 19 March 2016

मगर..

धड़क के दिल का कुछ कहना ..तो ठीक है ! मगर मचल के उसको सुनना.. हर बार अच्छा नहीं !

Tuesday, 15 March 2016

सोचते हैं !

सोचते हैं हो जाएं
बदजुबां हम भी कभी ,

पै क्या करें,
सीखे थे जो कभी
वो अदब जाता नहीं !

Friday, 11 March 2016

आँसू

तुम नज़र से यूँ गिरे ..जैसे के एक आँसू !