Monday, 20 January 2014

उसने कहा था !


बहुत जी करता है के -
घुली-घुली सी खुशबू हो हवा में
सूरज समन्दर में डूबने को हो
और मैं मीठी झील किनारे तेरा इंतज़ार करूँ !
नींद ने करवट न ली हो पलकें झुकी न हो
जागती आँखों से ख्बाबों में मैं तेरा दीदार करूं !
रात न डूबी हो सुबह न जागी हो
चाँद मद्धम-मद्धम पिघल रहा हो बादलों में  
ऐसे तारों की छाँव में मैं तुझसे इकरार करूँ ! 
सोंधी-सोंधी ,थोड़ी शबनम में भीगी हुई
गुलाब की पंखुड़ी सी तुम आओ
और फिर मैं तुम्हें जी भर के प्यार करूं !